कुछ नहीं कहना चाहता
आंखों से ही चख लेना,
आत्मा आज तरस रही है, अरमानों की घटा बरस रही है, मुझे तुम मिल जाओ, मेरी सांसों में घुल जाओ,
हां मैंने किया है, तुम भी करती हो, इकरार न करने का दिखावा करती हो,
अचानक ही तुम्हें कुछ हो जाएगा,
तुम्हारी मनाही का सच प्यार में बदल जाएगा,
तुम्हारी भी हालत मेरी सी होगी, तब जाकर मेरी ख्वाहिश पूरी होगी।
.jpg)
