आज फिर लिखने का खयाल

आज फिर लिखने का खयाल आया दिल में उलझनों का सवाल आया ये किस राह चला जा रहा हूँ में कि हर डग में डगमगाता जवाब आया।
लोग मरते हैं चार हर्फ चार हर्फ
मेरे मरने से पहले तो जहां है बाकि।
मैं खुदा से पूँछता हूँ
अपने से ही जूझता हूँ
फिर किसके सहारे जाऊँ मैं भी बहुत कुछ चाहता हूँ खुदा से या खुद से आस लगाऊँ।
एक दिन सब चले जाएंगे जो कल थे वे आज नहीं और जो आज थे वे कल नहीं आएंगे फिर में क्यों खुद से प्रीत करता हूँ

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