Thursday, May 27, 2010

चाहत...

जिंदगी क्या है...
ये बताएं कैसे...
तेरे माफिक नज़र आऍं कैसे...
तूने ढक रखा है,अपनी ऑंखों को...
सोच तुझे नजर आएँ कैसे...
चाहत तुझ मैं भी है मुझ मैं भी...
है दोनों जानिब...
तूँ माहिर है इसमें
पर हम छुपाऍं कैसे...

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