Sunday, May 2, 2010

हम अच्‍छे हैं, बुरे हैं...

हम अच्छे हैं, बुरे हैं, सच्चे हैं, झूठे हैं, दोस्त हैं, दुश्मुन हैं, मज़े में हैं, फसे में हैं, गुलाम हैं, आजाद हैं, मूक हैं बाचाल हैं, अकारथ हैं, सकारथ हैं, बुद्धु हैं, होशियार हैं, स्वस्थ हैं, बीमार हैं, उदास हैं, प्रसन्न हैं, रीझे हैं, खिन्न हैं, धनी हैं, फक्कड़ हैं, रुके हैं, धुमक्कड़ हैं, चुलबुले हैं, धीर हैं, चंचल हैं, गंभीर हैं, निरंग हैं, सतरंगे हैं, शोर हैं, शान्ति हैं, तर्क हैं, भ्रांति हैं, बिरादवली हैं, व्‍यंग हैं, राज हैं, उजागर हैं, मीत हैं, प्रथक हैं, आलस हैं, सजग हैं, रीत हैं, विपरीत हैं, शीत हैं, ग्रीष्म हैं, भूखे हैं, अफरे हैं, सिमटे हैं, विखरे हैं........ जीवन में विरोधाभासों और पूरकों की मिलावट हैं जिससे मिलाजुला सा एक व्यक्ति बनता है और वह "मैं" हूँ .......... ( यहॉं "मैं" के मायने हर उस व्यक्ति से हैं जो इसे पढ़ रहा है। )

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